रायपुर/नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत अब लॉकडाउन खत्म करने की ओर बढ़ रहा है। एम्स के डॉक्टरों की स्टडी में सुझाव दिया गया है कि भारत को अपना शिखर निकलने के बाद कुछ हफ्तों तक इंतज़ार करना चाहिए, जिससे लॉकडाउन के असल लाभों का फायदा उठाया जा सके।
स्टडी में कहा गया है, “लॉकडाउन को पूरी तरह हटाए जाने पर, तारीख चाहे कोई भी हो, हमने पाया कि परिवर्तनीय विलंब के बाद सक्रिय केसों की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी। हमने ऑब्जर्व किया कि शिखर निकल जाने के बाद लॉकडाउन में ढील दिए जाने में देर करने से वो समय अंतराल बढ़ जाता है जो ढील की तारीख और सक्रिय केसों की नई बढ़ोतरी की तारीख के बीच होता है।”
स्टडी में आगाह किया गया है, “हालांकि, भारत अभी अपने शिखर तक नहीं पहुंचा है क्योंकि कोरोना वायरस केसों के दैनिक जुड़ाव की 7-दिन की रोलिंग औसत में अभी तक गिरावट नहीं देखी गई है. ऐसी स्थिति में, लॉकडाउन में ढील दिए जाने से कोरोना वायरस केस तेजी से बढ़ सकते हैं।’’
स्टडी के मुताबिक “देश भर में लॉकडाउन का अचानक और पूरी तरह से हटाया जाना व्यावहारिक विकल्प नहीं है। क्योंकि यह कदम ‘हर्ड इम्युनिटी’ (झुंड प्रतिरक्षा) की गैर मौजूदगी में केसों की संख्या में तेज बढ़ोतरी होते देखेगा। पर्याप्त लंबाई और असर वाला लॉकडाउन अंततः सक्रिय केसों को शिखर तक ले जाकर धीरे-धीरे नीचे लाना शुरू करता है।”
स्टडी में कहा गया है कि एक बार सक्रिय केस शिखर पर पहुंच जाते हैं तो लॉकडाउन का विस्तार करने से अतिरिक्त लाभ हो सकते हैं। जैसे कि आबादी में संक्रामक पूल की थकान जिसकी तुलना छूट से पहले Covid-19 के कम फैलाव से की जा सकती है।
लॉकडाउन का विस्तार सक्रिय केसों की नई बढ़ोतरी (या दूसरी लहर) में देरी के साथ आता है. संभावित दूसरी लहर में देरी करना अहम है क्योंकि यह सरकार को अपने हेल्थकेयर सिस्टम को तैयार करने के लिए और अधिक वक्त देगा। इसलिए इस मॉडल के मुताबिक कोई देश अगर लॉकडाउन में ढील देने में जितनी देर करता है तो उसे उतना ही तैयारी के लिए अधिक वक्त मिलता है।
चीन सख्त लॉकडाउन उपायों को लागू करने और उनमें ढील देने में देर करने की क्लासिक मिसाल है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक चीन 13 फरवरी को अपने शिखर पर पहुंचा, जब उसने एक ही दिन में 15,133 केस देखे. चीन ने 8 अप्रैल को महामारी के एपिसेंटर वुहान को शिखर पर पहुंचने के करीब दो महीने बाद बंदिशों से खोला और मौजूदा स्थिति में वो पूरे शहर की टेस्टिंग कर रहा है।
यदि भारत शिखर को हिट करने के दो हफ्ते बाद लॉकडाउन में पूरी तरह से ढील देता है तो संभावना है कि सक्रिय केस पांच दिन में बढ़ सकते हैं, लेकिन अगर यह शिखर पर पहुंचने के एक महीने के बाद लॉकडाउन को रिलेक्स करता है, तो ऐसा करने से दूसरी लहर से निपटने के लिए तैयार होने में करीब एक हफ्ता और मिल जाएगा।
स्टडी से यह भी पता चलता है कि अगर शिखर हिट करने के बाद लॉकडाउन को आठ सप्ताह (या दो महीने) के लिए बढ़ाया जाता है, तो भारत को सक्रिय केसों में एक नई बढ़ोतरी की तैयारी के लिए लगभग 15-16 दिन का अतिरिक्त समय मिल सकता है। स्टडी के मुताबिक अगर लॉकडाउन को अचानक हटाने की जगह धीरे-धीरे उठाया जाता है तो इससे तैयारी के वक्त में और अधिक लाभ होता है क्योंकि सक्रिय केसों में नई बढ़ोतरी धीमी गति से होती है।
स्टडी में लॉकडाउन में ढील के बाद टेस्टिंग बढ़ाने के असर का भी विश्लेषण किया गया है। रिसर्च के मुताबिक लॉकडाउन में ढील के बाद सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बढ़ी हुई टेस्टिंग संक्रमण की कुल संख्या को खासी घटाने में मदद करती है।
स्टडी में कहा गया है, `ढील की हद, जो कि संक्रमण के असहनीय पलटाव के बिना संभव हो, बहुत ज्यादा की गई टेस्टिंग के स्तर पर निर्भर करती है, खास तौर पर लॉकडाउन के बाद छूट की स्थिति में, जबकि गहन सोशल डिस्टेंसिंग और बहुत महंगी टेस्टिंग दोनों का साथ होना गैर व्यावहारिक हो सकते हैं, लेकिन दोनों के असर को जहां तक संभव हो सके वहां तक ले जाने से महामारी को नियंत्रण में रखा जा सकता है।”