संपादकीय कोई भी समृद्ध समाज सरकार से ज्यादा सशक्त होता है। सरकार जो नहीं कर सकती,वह समृद्ध समाज कर सकता है। सरकार कितना भी बड़ा अस्पताल खोल ले, वहां किसी न रूप में लोगों के पैसा वहां के लोग वसूल ही लेते हैं। कहा जाता है कि सरकारी अस्पताल में मुप्त इलाज होता है लेकिन वहां पैसा खर्च करना ही पड़ता है। इससे समाज के गरीब लोगों को वह सुविधा नहीं मिल पाती है जिसकी उन्हें जरूरत रहती है। अस्पताल कैसे होने चाहिए यह दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी से सरकारों की सीखना चाहिए। कमेटी ने सराय काले खां स्थित गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में विश्वस्तरीय सुविधा वाली किडनी डायलिसिस अस्पताल शुरू किया है।वर्तमान में इस अस्पताल मेंं 100 बेड हैं।सबसे अच्छी बात यह है कि यहां कोई बिलिंग काउंटर नहीं होगा। यानी यहां कहीं भी किसी को कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा।सब जानते हैं कि डायलिसिस कितना महंगा होता है, इसे कराने में कितनी परेशानी होती है।सरकारी अस्पताल में भी इसका बहत पैसा लगता है। इस अस्पताल में मरीजों को डायलिसिस के साथ दवाई मुफ्त मिलेगी। मरीज के परिजनों को खाना गुरुद्वारा के लंगर में मुफ्त मिलेगा। देश में ऐसे अस्पतालों की जरूरत ज्यादा है जहां अमीर व गरीब का भेद नहीं किया जाता है।जहां पीड़ित लोगों की पीड़ा दूर करना ही सबसे बड़ा काम माना जाता है।देश व राज्यों के ज्यादातर सरकारी व निजी अस्पताल लोगों की परेशानी दूर करने की जगह परेशानी बढ़ाने वाले होते हैं। हर काम के पैसे लिए जाते हैं। ज्यादा से ज्यादा पैसे वसूलने की कोशिश होती है। इससे ऐसे अस्पताल लोककल्याण का केंद्र नहीं बन पाते हैं। वैसे तो कई समाज सिख समाज से भी संपन्न होंगे लेकिन समाज के संपन्न होने भर से कुछ नहीं होता है जब तक समाज में लोककल्याण की भावना न हो, लोककल्याण के लिए कोई तंत्र विकिसत न हो ।सिख समाज संपन्न समाज होने के साथ लोककल्याण के लिए सबसे आगे रहने वाला समाज है। इससे वह समाज देश व दुनिया के लिए ज्यादा कल्याणकारी है। इसके लिए उसकी सराहना तो की ही जानी चाहिए।