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*ग्रामीण फंड से 61साल बाद हो रहा तोडगांव के बड़े तालाब का पुनरोद्धार कार्य*

11-May-2021

रायपुर (शोर सन्देश) तकरीबन 1500 की आबादी वाला छोटा सा ग्राम इकट्ठा किए गए ग्रामीण फंड से गांव के नवनिर्माण में जुटा है इकट्ठा होने वाले ग्रामीण फंड से बीते बरस ग्रामवासियों ने लगभग 6 लाख रूपए की लागत से ग्राम के `छोटे तालाब ` को नवजीवन दिया था। तो इस साल ग्राम के जीवनदायिनी करीबन ‌‌‌‌‌‌‌8 एकड में फैले `बड़े तालाब ` का पुनरोद्धार कार्य शुरू किया है इसमें करीब 8 - 9 लाख रूपए खर्च का अनुमान है जनपद पंचायत आरंग के अधीन आता है यह छोटा सा गांव तोडगांव गोढ़ी एक हजार से अधिक मतदाता होने की वजह से यहां ग्रामपंचायत तो है ही, ग्रामवासियों ने ग्रामीण व्यवस्था चुस्त - दुरुस्त रखने ग्राम पंचायत के इतर ग्रामीण सभा का भी गठन कर रखा है ग्राम में विभिन्न मंडलियां समितियां भी है ग्रामीण व्यवस्था केतहत ग्रामवासी आपस में मिलजुल विभिन्न मदों में राशि तोएकत्रित करते रहते हीहैं , ग्राम में गठित विभिन्न समितियों मंडलियों को भी चढ़ावा सहयोग राशि मिलता रहता है बीते साल से ग्रामीण सभा एकजुटता दिखा समितियों मंडलियों के सहयोग से तालाबों के पुनरोद्धार कार्य में जुटा है इस बड़े तालाब के पुनरोद्धार कार्य मेग्रामीण सभा को रामलीला रामायण मंडली आदि का भी सक्रिय आर्थिक सहयोग मिला है । ग्रामवासियों केनिस्तार के लिए यह प्रमुख तालाब होने के साथ - साथ इस तालाब से ग्राम के कई एकड़ खेतों को सिंचाई पानी भी मिलता है पुनरोद्धार कार्य में तालाब सेगाद निकालने गहरीकरण के साथ - साथ सिंचाई गेट पचरी निर्माण की भी योजना ग्रामीणों की है पर यहसब राशि की उपलब्धता पर निर्भर है जल संसाधन विभाग से गर्मी केमौसम में निस्तारी के लिए पानी मांगने के बाद भी इस साल निस्तारी पानी मिल पाने की जानकारी मिलने पर तोडगांव पहुंचे किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेन्द्र शर्मा को जब ग्रामीणों के इस रचनात्मक कार्य की जानकारी मिली तो तालाब पुनरोद्धार कार्य स्थल पर जा मौजूदा ग्रामवासियों को बधाई दी श्री शर्मा ने बतलाया कि मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण कार्य में किसी भी ग्राम के प्रबुद्ध जागरूक ग्रामीणों काअनुभव अच्छा नहीं है पुनरोद्धार कार्य चल रहे तालाब में 61 वर्षों से जमा गाद के परिप्रेक्ष्य मे उन्होंने कहा कि एक समय था। जब इसगाद को जो एक सर्वोत्तम खाद होता है किसान स्वयं के खर्च मेहनत से अपने खेतों मेपालते थे , आज इसे ग्राम को खर्च दे निकलवाना पड़ रहा है कभी अपने चुस्त-दुरुस्त ग्रामीण व्यवस्था केलिए क्षेत्र में चर्चित रहने वाले इस ग्राम के इतिहास को याद करते हुए श्री शर्मा बतलाते हैं कि बीते एक - दो वर्षों से इस ग्राम के मामले थाना तहसीली जाने से ग्रामीण व्यवस्था दरकते जाने का आभाष होता है। जो ग्रामहित में नहीं है पर ऐसे रचनात्मक कार्यों में एकजुटता से लगता है कि वे ग्रामीण व्यवस्था को एकबार फिर पूर्ववत् बनाये रखने में सफल होंगे शासन - प्रशासन का सहयोग भी इन्हें मिलेगा  



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